रविवार, 19 जुलाई 2015

कविता शीर्षक :- हिंसा

हिंसा हुई तो कब हुई 
यह एक प्रश्न है ?
पूर्व या पश्चिम में !
रेत या जल में !
अस्तित्व की धुरता में !

मनुष्य की अभिलाषा का
शास्त्रीय मानदंड है हिंसा
जहाँ ज़रा सा पाने के बीच
अभिशप्त है बहुत कुछ खोना,
विकास की पहली स्थापना से
पहले भी होती थी हिंसा
और भोग के नवाचार में
कुत्सित विस्तार की पूंजी
बटोरना भी है हिंसा,
हिंसा का इतिहास
जन्मता है सृजन साथ
प्रश्न तब भी यही कि
हिंसा हुई तो कब हुई ?

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