मैं कविताएँ लिखता हूँ
कभी सिर्फ कुछ पंक्तियाँ
तो कभी कुछ शब्द,
लिखना तो बहाना हैं
मैं हर बार उठाता हूँ कुछ खतरे
जिनमें मेरे मतलब में
भर दिए जाते हैं
बहुत सारे मतलब
और मनाता हूँ त्यौहार
हर बार बच निकलने का
शायद आड़ी- तिरछी रेखाओं से
मेरा होना हो जाता है
आभासी /
कभी सिर्फ कुछ पंक्तियाँ
तो कभी कुछ शब्द,
लिखना तो बहाना हैं
मैं हर बार उठाता हूँ कुछ खतरे
जिनमें मेरे मतलब में
भर दिए जाते हैं
बहुत सारे मतलब
और मनाता हूँ त्यौहार
हर बार बच निकलने का
शायद आड़ी- तिरछी रेखाओं से
मेरा होना हो जाता है
आभासी /
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