रविवार, 19 जुलाई 2015

मुझे आज प्रेम मिला
हमेशा की तरह किसी 
कोने में छिपा हुआ नहीं 
बल्कि चार इंसानों के बीच 
जो थे काट रहे एक पेड़ 
जो शायद अपनी बीमारी से
कल रात की आंधी में
था गिर गया /
वो इस प्रेम भाव में
थे इतने मग्न कि
शाम को बनने वाले व्यंजन की खुश्बू से
उनको प्यास भी नहीं लग रही थी
दरअसल उनको जल्दी थी
क्योंकि उनको पता था कि
उनका प्रेम न जाने कब
बदल जाये वहशीपन में
उनको डर था कि उनकी प्यास
धीरे-धीरे बँटवारे की ओर
है बढ़ रही, जिस तेज़ी-तेज़ी से
चल रही है उनकी आरियाँ
उनका प्रेम बढ़ रहा है
कहीं शरीर के कोने में
ट्यूमर की तरह /

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