शुक्रवार, 2 मई 2014

ख्वाबों का सौदा

मैंने ख्वाबों के बहुत से 
सौदे किये हैं अब तक ,
जब बचपन में चौक से गुजरता 
तो गुब्बारे वाला मुझसे करता था सौदा,
और ख्वाबों की कड़ी दोपहर में तो,
न जाने कितने दिल रोज़ करते थे सौदा, 
आज जब ख्वाबों ने मुझसे 
सौदा करना छोड़ दिया है 
या कहूं कि वो अब आते नहीं ।
तो सोचता हूँ कि अब ख्वाब
बचे नहीं या कि मैंने सारे सौदे कर लिए ? ......
मालूम करने निकला तो
लगा कि ख्वाबों में तो.... था मैं ,
तो सौदा किसका ?
क्योंकि उस गुब्बारेवाले के
बिक गए हैं सारे गुब्बारे , और
अब ख्वाबों में कड़ी दोपहर नहीं होती //////

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