सन्नाटों से गुजरती हवाओं से
कभी तुमने बातें की हैं ?
बहती नदियों के किनारे बैठकर
कभी तुमने सुनी है उनकी दास्तां?
चमकते तारों में खोये चाँद से
कभी तुमने पूछा है उसका ठिकाना ?
या बेख्याली में चलते हुए
कभी तुमने ज़िन्दगी को किया है महसूस?
****************************** *************
कभी वक़्त मिले तो लिखना मुझे
उन हवाओं की बातें
उन नदियों की दास्तां
उस चाँद का ठिकाना
और हाँ, देखो!
उस ज़िन्दगी को न भूल जाना
क्योंकि थोड़ी बेख्याल है ये ////
कभी तुमने बातें की हैं ?
बहती नदियों के किनारे बैठकर
कभी तुमने सुनी है उनकी दास्तां?
चमकते तारों में खोये चाँद से
कभी तुमने पूछा है उसका ठिकाना ?
या बेख्याली में चलते हुए
कभी तुमने ज़िन्दगी को किया है महसूस?
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कभी वक़्त मिले तो लिखना मुझे
उन हवाओं की बातें
उन नदियों की दास्तां
उस चाँद का ठिकाना
और हाँ, देखो!
उस ज़िन्दगी को न भूल जाना
क्योंकि थोड़ी बेख्याल है ये ////
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