इतिहास लिखा जा चुका था
या इतिहास लिखा जा रहा है
या कह दूँ कि
अभी लिखा जायेगा
इतिहास,
किसी बड़े से घर में रहते हुए
इंसान रोज़ जीता है एक इतिहास
जिसमें जगहें छोटी होती जाती हैं
क्योंकि इंसान बड़ा होने की कोशिश में है
कभी दूसरों या कभी खुद के लिए
वो नहीं उठाना चाहता है खतरा
मात्र इंसान बने रहने का ....///
श्वेत रक्त में इतिहास रंजित है
जिसकी अँधेरी लिजलिजी दुर्गंधियों में
रहते हुए जीवित मनुष्य
आज तिलचट्टा बन बैठा है
जो वर्त्तमान को
इतिहास की विष्टि पर
अपने षडहस्तों के
आभासी मुनाफे में
रोज़ एक फीता कम कर देता हैं, व
भविष्य का संसार है चाहता रचना
संयोग से अंधरे में परछाई
न लम्बी होती है न छोटी
एक भ्रम मात्र
अहम् ब्रम्हास्मि ....../////
या इतिहास लिखा जा रहा है
या कह दूँ कि
अभी लिखा जायेगा
इतिहास,
किसी बड़े से घर में रहते हुए
इंसान रोज़ जीता है एक इतिहास
जिसमें जगहें छोटी होती जाती हैं
क्योंकि इंसान बड़ा होने की कोशिश में है
कभी दूसरों या कभी खुद के लिए
वो नहीं उठाना चाहता है खतरा
मात्र इंसान बने रहने का ....///
श्वेत रक्त में इतिहास रंजित है
जिसकी अँधेरी लिजलिजी दुर्गंधियों में
रहते हुए जीवित मनुष्य
आज तिलचट्टा बन बैठा है
जो वर्त्तमान को
इतिहास की विष्टि पर
अपने षडहस्तों के
आभासी मुनाफे में
रोज़ एक फीता कम कर देता हैं, व
भविष्य का संसार है चाहता रचना
संयोग से अंधरे में परछाई
न लम्बी होती है न छोटी
एक भ्रम मात्र
अहम् ब्रम्हास्मि ....../////