मंगलवार, 12 अक्टूबर 2010

अचेतन

मेरी महफ़िल के गीत पुराने
आज नवल से क्यों लगते है ?
एक जो था फ़साना मेरा
आज पराया क्यों लगता है ?
मेरी महफ़िल के ..........
तेरी वो गलिया तेरे चौबारे 
एक वो नज़ारे एक वो इशारे
कहने को मैं कहता क्या
जो महफ़िल के रंग जमाते /
आज नवल से क्यों लगते है 
मेरी महफ़िल के गीत पुराने ?
जीवन तेरा मेरी छाया है
कैसे इससे जुदा हो जाऊ
लाख मनाऊ फिर से आऊ
तेरी महफ़िल का जाम मैं पाऊ
गहराई तेरी छुना चाहा
पनघट से क्यों लौट मैं आया
तेरे अरमानो का दीप जलाया
फिर भी अँधेरा क्यों लगता है ?
मेरी महफ़िल के गीत पुराने
आज नवल से क्यों लगते है ?

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