मंगलवार, 12 अक्टूबर 2010

बाकी

अभी तो मैं चला हूँ
अभी तो राह है अधूरी,
अभी तो कारवां बना है
अभी तो मंजिले है बाकी
कुछ सोच कर किया था
पर, गुमां है बाकी
अभी तो कश्तियाँ चली है 
अभी साहिल पे लहरों का आना है बाकी  
अभी हलचल हो रही है
अभी कुछ बदलने लगा है/

सरज़मी पर खून की बुँदे है गिरी
आज उन्हें पानी बनना है बाकी
हर तरफ सब बदलने लगा है , लेकिन
आदमी की फितरत बदलना है बाकी
हर तरफ कुछ नया करना है बाकी
पर, उससे पहले नई सदी का 
नया आदमी आना है बाकी  /

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