इस राष्ट्र के आधे से ज्यादा
विधाता मिट्टी के घर में
कर रहे है अपने करो से
अपने भूत ,वर्तमान .भविष्य का निर्माण
मन भी इनका मिट्टी के
गीले लोंदे सा है
क्योंकि यह रहते है मिट्टी के घर में
आज अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रहे
अपने बचपन में
अपनी किस्मत आजमा रहे
अपने प्रचंड सत्व से
राष्ट्र को जगा रहे
क्योंकि राष्ट्र का भविष्य
पल रहा,
मिट्टी के घर में /
विधाता मिट्टी के घर में
कर रहे है अपने करो से
अपने भूत ,वर्तमान .भविष्य का निर्माण
मन भी इनका मिट्टी के
गीले लोंदे सा है
क्योंकि यह रहते है मिट्टी के घर में
आज अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रहे
अपने बचपन में
अपनी किस्मत आजमा रहे
अपने प्रचंड सत्व से
राष्ट्र को जगा रहे
क्योंकि राष्ट्र का भविष्य
पल रहा,
मिट्टी के घर में /
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