ये रास्ता जो सड़क से
बाँए फिर दाँए फिर दाँए
और फिर बाँए.............
एक धमनियों के तंत्र कि भांति
मुझे और .......... लगता है
मेरे जीवन के सामान
एक न समाप्त होने वाला
प्रश्न है ?
जग कहता है समाप्त !
पर सच कहूँ
ये भुलावे , धोखेबाजी
नहीं आती मुझे
क्या इस मांस के लोथड़े
का छिछला हो जाना ही
लाल होने का है प्रतीक ?
कबीर भी लाल होते है
अस्तित्व उनका भी होता
है लाल ,पर
मुझे तो दिखता
नहीं कही लाल
बल्कि दिख पड़ती वही धमनियां
काली..............!!!!!
बाँए फिर दाँए फिर दाँए
और फिर बाँए.............
एक धमनियों के तंत्र कि भांति
मुझे और .......... लगता है
मेरे जीवन के सामान
एक न समाप्त होने वाला
प्रश्न है ?
जग कहता है समाप्त !
पर सच कहूँ
ये भुलावे , धोखेबाजी
नहीं आती मुझे
क्या इस मांस के लोथड़े
का छिछला हो जाना ही
लाल होने का है प्रतीक ?
कबीर भी लाल होते है
अस्तित्व उनका भी होता
है लाल ,पर
मुझे तो दिखता
नहीं कही लाल
बल्कि दिख पड़ती वही धमनियां
काली..............!!!!!
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