उड़ता हुआ मेरा मन
एक रोज़ जब रोया था
कुछ सपनो के संग कुछ अरमा टूटे
कुछ खुशियों के भी घर टूटे
अल्फाज पुराने लगते थे
कुछ साल पुराने लगते थे
तब तो कुछ कहना था मुश्किल
वह आज नवल से क्यों लगते है ?
अरमानो का एक उड़न खटोला
पल- पल अपने रूप बदलता
मेरे भी थे कुछ ऐसे अरमा
जो घुट-घुट के रोया करते थे /
जब उस नव यौंवन के पनघट से
छन -छन की आवाज उठे
उड़ता हुआ मेरा मन
उस रोज़ तब रोया था /
एक रोज़ जब रोया था
कुछ सपनो के संग कुछ अरमा टूटे
कुछ खुशियों के भी घर टूटे
अल्फाज पुराने लगते थे
कुछ साल पुराने लगते थे
तब तो कुछ कहना था मुश्किल
वह आज नवल से क्यों लगते है ?
अरमानो का एक उड़न खटोला
पल- पल अपने रूप बदलता
मेरे भी थे कुछ ऐसे अरमा
जो घुट-घुट के रोया करते थे /
जब उस नव यौंवन के पनघट से
छन -छन की आवाज उठे
उड़ता हुआ मेरा मन
उस रोज़ तब रोया था /
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