अभिमन्यु ने कहा
पिता की अनुपस्थिति में
निभाऊंगा मैं धर्म
क्योंकि कृष्ण ने उनसे कहा था
आत्मा अजर है, अमर है/
पिता की अनुपस्थिति में
निभाऊंगा मैं धर्म
क्योंकि कृष्ण ने उनसे कहा था
आत्मा अजर है, अमर है/
तर्कातीत अस्तित्व को कसूंगा
कर्म के व्यवहार से
भले ही न लेकर आया था
न लेकर जाऊंगा /
कर्म के व्यवहार से
भले ही न लेकर आया था
न लेकर जाऊंगा /
विभ्रम से मुक्ति की कामना नहीं
जगत मिथ्या है , माया है
शीश लगी पंक्ति पर रख शर
पूर्ण करूँगा वचन
मगर निभाउंगा धर्म /
जगत मिथ्या है , माया है
शीश लगी पंक्ति पर रख शर
पूर्ण करूँगा वचन
मगर निभाउंगा धर्म /
अभिमन्यु को प्राप्त वरदान
आत्मा अजर है
निभाना धर्म कलयुग में भी
बस किसी कृष्ण के अनुसार
अस्तित्व से परे
तर्कातीत विभ्रम के साथ
और कहना डार्विन ने भी
तुम्हे यही कहा था
कलयुग की संतति/
आत्मा अजर है
निभाना धर्म कलयुग में भी
बस किसी कृष्ण के अनुसार
अस्तित्व से परे
तर्कातीत विभ्रम के साथ
और कहना डार्विन ने भी
तुम्हे यही कहा था
कलयुग की संतति/
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