अनुनाद
शुक्रवार, 18 मई 2012
जीवन और आकाल
कभी दिल ये दरिया था
आज न तो दरिया है और
न ही पानी ........
न ही गहराई ....
रह गया है तो मात्र
एक छिछला सा तलहट
जिसमे न जीवन है
और न अतीत के निशान...////
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