पग-पग मैं चलता जीवन राही
राह पकड़ अपने जीवन की
सोच समुन्दर सा गहरा था
कर्म की रेख नापती इसको
लगता कितनी दूर चलू मैं
सोच की गहरे ढूंढ़ चलू मैं
उस कर्म रेख की गहरी स्याही
अपने जीवन पर छोड़ चलू मैं /
पग-पग मैं चलता जीवन राही
राह पकड़ अपने जीवन की ....
राह पकड़ अपने जीवन की
सोच समुन्दर सा गहरा था
कर्म की रेख नापती इसको
लगता कितनी दूर चलू मैं
सोच की गहरे ढूंढ़ चलू मैं
उस कर्म रेख की गहरी स्याही
अपने जीवन पर छोड़ चलू मैं /
पग-पग मैं चलता जीवन राही
राह पकड़ अपने जीवन की ....
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