शुक्रवार, 18 मई 2012

ईशा और मैं



ईशा को भी मिला था
सलीब पे कुर्बा होने का
सिला .....
मैंने भी होना चाहा कुर्बा
पर न अब वो सलीब ही रहा
और न वो खुदा ...
ऐसा नहीं कि मैं कभी
खुदा होना चाहा
पर होना चाहा उन लोगो का
जिनका खुदा होता है ...
पर न वो लोग मिले
और न मैं कुर्बा हुआ ...
धत तेरी कि .....

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें