आज भी याद आता
घुटनों के बल घूमना
तुम्हारा
सामानों का करीने से रखना
फिर थककर बैठ जाना
कुछ देर
फिर उठाना भड़ककर गुस्सा
होना तुम्हारा , मुझपर
और कहना मेरा नाम
अपनी तोतली जुबान से
आज भी याद आता
पैर पटक-पटक कर चलना
तुम्हारा
पल भर , में मचल जाना
कुछ पल हवाओं में नाचना
तुम्हारा
फिर हौले से अपनी बांहों
में ले , जो मुझे हर बात
से दूर ले जाती
आज भी याद आता है
सब कुछ ठीक होते हुए
गुस्सा हो तुम्हारा
सड़क पर गुस्से में
आगे चलना तुम्हारा
फिर पीछे-पीछे मेरा आना
लड़ना कहीं भी सड़क पर
और कहना तुम्हारा
मैं अकेली चली जाउंगी
कितनी बार गई हूँ अकेले
तुम्हारी कोई जरुरत नहीं
आज भी याद आता
तुम्हारा अगली सुबह
दरवाजे पर दस्तक देना
और इक प्यारी सी
मुस्कान बिखेर देना
जो मेरी सोई हुई
आँखों में इक सुबह
की खिलखिलाती धूप
सी जाती फ़ैल
आज भी याद आता
हर ख़ुशी और हर गम
जो साथ-साथ बांटी
साथ तुम्हारे
आज भी याद आता
तुम्हारे बाँहों का कसाव
तुम्हारे होंठो की नमी
जो मुझे इस दुनिया से
दूर ले जाती है जहाँ
होती हो तुम और
याद आती तुम्हारे बदन
की खुशबु , जो
जाने के बाद भी
मेरे तन में बसी रहती
आज भी याद आता
घंटो तुमसे बातें करना
और वक़्त का पता न चलना
ख्वाबो में डूबकर , पूरी
रात तन्हाई में गुजरना
आज भी याद आता है /
आगे भी याद आएगा
जब तुम चली जाओगी
मेरी ज़िन्दगी से दूर बहुत
और मेरा कोई निशान भी
रहेगा न तुम्हारे इल्म में
पर तुम न समझो , शायद
बेहतर होगा
क्योंकि तब भी याद
आओगी मुझे ,जैसे
आज भी याद आता
घुटनों के बल घूमना
तुम्हारा ....//////
घुटनों के बल घूमना
तुम्हारा
सामानों का करीने से रखना
फिर थककर बैठ जाना
कुछ देर
फिर उठाना भड़ककर गुस्सा
होना तुम्हारा , मुझपर
और कहना मेरा नाम
अपनी तोतली जुबान से
आज भी याद आता
पैर पटक-पटक कर चलना
तुम्हारा
पल भर , में मचल जाना
कुछ पल हवाओं में नाचना
तुम्हारा
फिर हौले से अपनी बांहों
में ले , जो मुझे हर बात
से दूर ले जाती
आज भी याद आता है
सब कुछ ठीक होते हुए
गुस्सा हो तुम्हारा
सड़क पर गुस्से में
आगे चलना तुम्हारा
फिर पीछे-पीछे मेरा आना
लड़ना कहीं भी सड़क पर
और कहना तुम्हारा
मैं अकेली चली जाउंगी
कितनी बार गई हूँ अकेले
तुम्हारी कोई जरुरत नहीं
आज भी याद आता
तुम्हारा अगली सुबह
दरवाजे पर दस्तक देना
और इक प्यारी सी
मुस्कान बिखेर देना
जो मेरी सोई हुई
आँखों में इक सुबह
की खिलखिलाती धूप
सी जाती फ़ैल
आज भी याद आता
हर ख़ुशी और हर गम
जो साथ-साथ बांटी
साथ तुम्हारे
आज भी याद आता
तुम्हारे बाँहों का कसाव
तुम्हारे होंठो की नमी
जो मुझे इस दुनिया से
दूर ले जाती है जहाँ
होती हो तुम और
याद आती तुम्हारे बदन
की खुशबु , जो
जाने के बाद भी
मेरे तन में बसी रहती
आज भी याद आता
घंटो तुमसे बातें करना
और वक़्त का पता न चलना
ख्वाबो में डूबकर , पूरी
रात तन्हाई में गुजरना
आज भी याद आता है /
आगे भी याद आएगा
जब तुम चली जाओगी
मेरी ज़िन्दगी से दूर बहुत
और मेरा कोई निशान भी
रहेगा न तुम्हारे इल्म में
पर तुम न समझो , शायद
बेहतर होगा
क्योंकि तब भी याद
आओगी मुझे ,जैसे
आज भी याद आता
घुटनों के बल घूमना
तुम्हारा ....//////
Fantabulous...........
जवाब देंहटाएंshukriya irfan bhai ,,,
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