सपने देखना मुश्किल नहीं
पर पूरा सच देखना
अपने हांथों में हो
ये मुश्किल होता , है न !
कभी किसी ने सोचा , ये
कि साहिल भी कभी थकेगा
है न असमंजस !
रोज़ थकता हूँ मैं
सोचो किससे ?
एक मंदी सी हंसी
आप होंगे हँसते , पर
शायद सच कहता मैं
अपने आप से
अपने मन से
अपने तन से
और सबसे ज्यादा
अपनी सोच के अधूरेपन से
सच कहता था न मैं
आखिर हंसी आ गई !!...
पर पूरा सच देखना
अपने हांथों में हो
ये मुश्किल होता , है न !
कभी किसी ने सोचा , ये
कि साहिल भी कभी थकेगा
है न असमंजस !
रोज़ थकता हूँ मैं
सोचो किससे ?
एक मंदी सी हंसी
आप होंगे हँसते , पर
शायद सच कहता मैं
अपने आप से
अपने मन से
अपने तन से
और सबसे ज्यादा
अपनी सोच के अधूरेपन से
सच कहता था न मैं
आखिर हंसी आ गई !!...
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