जीवन की सार्थकता के
अर्थ दो हो जाते है आज,
और उनका अर्थ भी
दो शब्दों के साथ ही
जाता है बदल ,
जैसे सफलता और असफलता
क्योंकि आज मनुष्य का
निराकार स्वरुप
नहीं है स्वीकार्य ,
वह समाज को
चाहता है प्रदान करना
आकार ,
जिसमे वह व्यक्ति
व्यक्ति के समूह को
अपने अनुरूप कर सके
प्रमाणित .../////
अर्थ दो हो जाते है आज,
और उनका अर्थ भी
दो शब्दों के साथ ही
जाता है बदल ,
जैसे सफलता और असफलता
क्योंकि आज मनुष्य का
निराकार स्वरुप
नहीं है स्वीकार्य ,
वह समाज को
चाहता है प्रदान करना
आकार ,
जिसमे वह व्यक्ति
व्यक्ति के समूह को
अपने अनुरूप कर सके
प्रमाणित .../////