एक डिबिया
और एक बाती
इसी के सहारे खोजते हैं
दुनिया के छिपे हुए
बचे हुए
आदिम अवशेष
जिसकी ललछौंक रोशनी में
वो रचते हैं पिछली सदी की
षड्यंत्रकारी पद्धतियों का
निगमनात्मक शास्त्र
जिसमें सदियों का काजल
होता रहता है इकठ्ठा
परत दर परत
और समय के विदुर उन्हें
शमित कर देना चाहते हैं
पवित्र जल की धार हाँथो में लेकर
जिससे वो इतिहास की वर्तुल गति में
चन्द्र को राहु के ग्रास तक पंहुचा सके
और उन तमाम लोगों के
पल्लवित होने की पहली शर्त का
कर सके मानकीकरण,
मनुष्य होने के
परिकल्पनात्मक सबूतों के मध्य
इंसान एक छिपा हुआ सियार है
जो घात लगाकर
अपना क्षेत्र निर्धारित करता है
जिसमें दूसरे अस्तित्व का प्रवेश निषेध है
अन्यथा मात्र एक अनुबंध
जीवन के समस्त अधिकार
महापात्र को अर्पित /
और एक बाती
इसी के सहारे खोजते हैं
दुनिया के छिपे हुए
बचे हुए
आदिम अवशेष
जिसकी ललछौंक रोशनी में
वो रचते हैं पिछली सदी की
षड्यंत्रकारी पद्धतियों का
निगमनात्मक शास्त्र
जिसमें सदियों का काजल
होता रहता है इकठ्ठा
परत दर परत
और समय के विदुर उन्हें
शमित कर देना चाहते हैं
पवित्र जल की धार हाँथो में लेकर
जिससे वो इतिहास की वर्तुल गति में
चन्द्र को राहु के ग्रास तक पंहुचा सके
और उन तमाम लोगों के
पल्लवित होने की पहली शर्त का
कर सके मानकीकरण,
मनुष्य होने के
परिकल्पनात्मक सबूतों के मध्य
इंसान एक छिपा हुआ सियार है
जो घात लगाकर
अपना क्षेत्र निर्धारित करता है
जिसमें दूसरे अस्तित्व का प्रवेश निषेध है
अन्यथा मात्र एक अनुबंध
जीवन के समस्त अधिकार
महापात्र को अर्पित /
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