शुक्रवार, 11 जनवरी 2013

कोल्ड नाइट

यूँ ही जागा रहा रात भर
बेचैन काली रात पूस में
ठण्ड से भी ठंडी रात
सडको पर सिर्फ दिखते है मटियाले
बनकर मेरे गिरेबान का कॉलर
बचाते मुझे सर्पतों की सुख्हंडों से
करके मुझे अकेला बिलकुल
क्योंकि उन्होंने कर दी घोषणा
अब तुम बहोगे १४४ धारा में
वर्ना पूर्णिमा के दरिन्दे तुम्हारे
गरमा- गर्म गोश्त को निकाल
लेंगे तुम्हारे कॉलर से
चिल्लाना तो बिलकुल भी न 
नहीं तो सेंक लेगे बार के कौड़ा
खड़ी धूप के कोहरे में गाँधी टोपीवाले नागरिक
और रंग बिरंगे प्रचारों के
साथ ही , तुम जाओगे बन 
टी आर पी के वन नाइट स्टार
और घर पर बैठे तिरोहित जन
गर्म चाय-पकोड़ों के साथ
तुम्हारी गंधैली ज़िन्दगी की
बदबू पर , करके इन्द्रिय बंद
जायेंगें बन गाँधी जी के बन्दर
जिनके होने का एहसास होता है
उनके सीने के फूलने पचकने से मात्र ...
पर तुम डरना नहीं क्योंकि
तुम्हारे लोथड़ों और खून
का डी एन ए आयोगों और समितियों
की स्याही में नीला दिखेगा ,और
गणतंत्र में तुम बन जाओगे काले
तुम्हारी स्निग्धता और स्वतंत्र
होने की इच्छा अब भी काली है
क्योंकि तुम्हारे देश का कानून
आज भी चलता है औपनिवेशिक 
दासता के ढर्रे वाली धर्मावली पर
और तुम्हारी भयानक आत्मा को
मिल न सकेगी मुक्ति न्यायाधिकरण में भी
चाहे करो कितने भी पिंड दान .........
जानते हो क्यूँ ....क्योकि मोक्ष के लिए भी
सब ठीक होना जरुरी है
और ठीक होने के लिए
तुम इतना तो ख़याल रखो कि
जब इस गणतंत्र में आँखे खोलो
तो तुम जन्मांध बन जाओ 
बना लो अपने दिल-फेफड़े को साउंड प्रूफ
और कानो में कुछ भी भुरभुराए तो
कान में डाल लो पिघला हुआ सीसा
और चेतन का सी टी स्कैन करके
बना दो रिपोर्ट कि तुम कोमा में हो ......
क्योंकि यूँ ही जागता रहा रात भर ............./////////////////

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