शुक्रवार, 29 जून 2012

निकाय चुनाव 2012

शहर में लोगो की भीड़ है यारो
और ग़ालिब भी कहते है
सलीके के लोग है यारो
कोई हसिया दिखता है
कोई कमल दिखता है
एक महाशय से मिला तो
कोई दिल दिखता है
कोई दरबा दिखता है
चौक से गुज़रा तो
कोई दस दिखता है
कोई सौ दिखता है 
आज ही खबरनवीसो से जाना
नशेमंदी न होगी अब ,पर
कोई वोदका दिखता है
कोई विस्की दिखता है
कल चाय पर कुछ पंडितो से जाना
हमारा शहर भी हाई-टेक हो जायेगा पर ,
कोई दाहिना दिखता है
कोई बांया दिखता है..
अब तो यह सूरत-ए-हाल निकला कि
बाटेंगे तुम्हे अब, पर
कोई हिन्दू दिखता है
कोई मुस्लिम दिखता है
शहर में लोगो की भीड़ है यारो
और ग़ालिब भी कहते है
सलीके के लोग है यारो

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें