सोमवार, 15 जुलाई 2013

भुक्का

मुझे बेतकल्लुफी से कहना न आया
जब भी कहा तो शब्दों का खिलवाड़
मात्रों का अगला पिछला करके
बना देता हूँ तेरे को मेरा और
बाइबिल से कुरआन से पुराण
बर्फ को मानचित्र पर लाल रंग
हूँ दे देता, साथ में तीसरी दुनिया को जेनोसाइड
अपराधी बनाकर हेग में कर देता हूँ खड़ा ,

अक्षरों में कुलबुलाहट होती है
मोनोलिसा की मुस्कराहट में
सतह के ऊपर बिलबिलाते रिगियाते
महाद्वीपीय मध्य का अबोध रोदन
जिसमे जीवन की श्रेष्टता की वंचना
दोनों कोरों पर आज तक जमी है ,

कहने में जब भी आया बस कहा
विमर्शों के पर्यावसान के बाज़ार में
जब भी खड़ा होता हूँ तो छूंछे हाँथ
जिससे लौटूं तो मेरे हाँथ खोखले
आदर्शों से भरे हो और मेरी आखों पर
यथार्थ का रंगीन चश्मा टंगा रहे
जिससे मैं अगली बार तुमसे मिलूं
तो तुम्हारे खोखले आदर्शों से आँखे मिला सकूँ
और तुम्हारे यथार्थ रंगीन हांथों को चूम सकूँ ///
(जिससे तुम सबको अपना
बनाने का भ्रम पाल सकूँ _) ... वित्रि

गौरैया

आज बहुत दिनों बाद देखी
मुंडेर पर बैठी गौरैया
शायाद एक अरसे बाद
बेगाने कसबे में तो बस पढ़ा था
उजड़ने के बाद मुश्किल होता है बसना
वहीँ सुना था कि उसको निर्वासित
घोषित कर दिया गया है ....
जिसकी आत्मा में स्वार्थ निहित होकर
सुन्दर की निर्मम हत्या करके उसे
कल्पना के रूप में रोज़ परोसा जाता
हाय! उस सुन्दर छलना के दर्शन फिर हुए /

बेखबर

मेरी चाहतें बिलकुल वैसी है
जैसे सुबह की ऒस बैठ जाती है 
पत्तों के कोरों पर,

उसकी चाहतें बिलकुल वैसी है 
जैसे हवा में उड़ता परिंदा 
जो उड़ जाना चाहता है उस पार,

हम दोनों की चाहतें बिलकुल वैसी है
जैसे हवाओं में तैरने के बाद ऒस
मिल जाती है असीम गहराइयों में
और परिंदा थक जाने के बाद
आ जाता है ज़मी पर
सुकून की चादर ओढने की तैयारी में,

इसी मेरी-तुम्हारी-हम दोनों
के बीच होते हुए भी
इन चाहतों के दरम्या
मैं बन जाता हूँ तुम्हारा, और
तुम मेरी निपट अपनी.....///// 

पहेली

कुछ गीत मुझे गढ़ लेने दो
कुछ बात मुझे कह लेने दो
तुम साथ चलो मेरे हमदम
कुछ साज़ मुझे बुन लेने दो

तुम यादों में रह जाते हो
जैसे हरी दूब के किनके
दांतों में फंस जाते है ...
रफ्ता-रफ्ता खिसक-खिसक के
वो थोड़ा सा जो सताते है,

गहन क्षणों में भी तुम
दबे पाँव चले आते हो
कहते हो कि अब जाते है
पर रात तलक तुम यूँ ही क्यों
ओंठों पर मेरे मुस्काते हो

तुम अपने से लगते हो
जैसे यादें हो जाती है
बढ़ते चलते इस रस्ते पे
तुम साथ मेरे चलो साथी

कुछ गीत मुझे गढ़ लेने दो
कुछ साज़ मुझे बुन लेने दो
तुम साथ चलो मेरे हमदम
कुछ बात मुझे कह लेने दो...////