शुक्रवार, 29 जून 2012

निकाय चुनाव 2012

शहर में लोगो की भीड़ है यारो
और ग़ालिब भी कहते है
सलीके के लोग है यारो
कोई हसिया दिखता है
कोई कमल दिखता है
एक महाशय से मिला तो
कोई दिल दिखता है
कोई दरबा दिखता है
चौक से गुज़रा तो
कोई दस दिखता है
कोई सौ दिखता है 
आज ही खबरनवीसो से जाना
नशेमंदी न होगी अब ,पर
कोई वोदका दिखता है
कोई विस्की दिखता है
कल चाय पर कुछ पंडितो से जाना
हमारा शहर भी हाई-टेक हो जायेगा पर ,
कोई दाहिना दिखता है
कोई बांया दिखता है..
अब तो यह सूरत-ए-हाल निकला कि
बाटेंगे तुम्हे अब, पर
कोई हिन्दू दिखता है
कोई मुस्लिम दिखता है
शहर में लोगो की भीड़ है यारो
और ग़ालिब भी कहते है
सलीके के लोग है यारो

बुधवार, 13 जून 2012

हरा + लाल = काला



भिन-भिन-भिन-भिन 
भिन-भिन-भिन-भिन........
इक संगीत ////
गूंज रहा था अचेतन में 
इक अजीब सी दुर्गन्ध 
रही थी फ़ैल 
दूर से दिख पड़ा कुछ
लाल और काले कपडे का चिथड़ा 
सुबह भी पहला रंग 
यही देखा था मैंने, पर 
उसे सुबह देखा था अकेले 
और अभी देख  रहा हू 
कईयों के बीच में 
बाढ़ में घर था डूबा 
तो लाल टिके के चक्कर में 
आया था गुलाबी शहर
जीना सीख ही रहा था 
रोज़ तिपहियो के चक्कों 
सा घिस कर 
कमाता भी ठीक था, पर 
इतना घिसता था कि
उस चिथड़े कि तरह
हरा बचाता लाल बचाता 
और बनता लाल को 
हरा और हरे को .........
और इसी हरे-लाल
मिलावट के दौर में 
काली थी ली पी, और 
कै पे कै भी हुई
उडी भी दुर्गंधिया 
फिर भी लाल-हरा का अंतर 
पहचान न पाया, शायद 
उसको रंगों कि जात 
थी नहीं सुझाती 
इसीलिए तो आज कुछ 
खाकी वर्दी और पंचनामे का कागज 
साथ में बहुत सारी दुर्गंधिया    
और भिन-भिन-भिन.....
भिन-भिन-भिन.......
का संगीत////
जो कह रहे थे कि कल
रात थी पी ली 
शराब ज़हरीली 
जो उसके हरे-लाल को 
मिला दिया और
बना दिया एक रंग 
काला ..............
,,,,,,,,,,,,,,,,,पक्का ///////

निर्णय


इस ग्रह की थी 
कुछ मर्यादाएं 
कुछ जीवित थी 
कुछ सड़ी-गली
कुछ स्वयं चली 
कुछ लादी गई 
इनका वहन
मुझे भी करना, पर
आगे निर्णय मेरा होगा 
किसे है लेकर चलना 
किसे दफन कर देना है
जिससे मेरी संतति को 
मेरा कुछ उपभोग मिले /////