इस अंधियारे में चुप्पी से
चाट रहे है कई दीमक
मेरे स्वप्न-घर के किवाड़
और तुम खड़े हो सामने मेरे
खोखल में पड़े लिजलिजे
दसियों दांतो वाले मासूम कीड़े से
जो निरंतर मद्धम मेहनतकश है
मेरी आँखों की चमक को
धुंधला करने के लिए,
जिससे मेरा लाख का महल
पाये न जलने अपितु
गिर जाये भुरभुराकर और
हज़ारों छिद्रों से घुंस सके
सिहरती सर्द हवाएं
जमा देने के लिए लाल ग्लेशियर
कभी देखा है उसे
जो चीरता रहता है निपट एकांत को भी
इस अंधियारे में
प्रकट होते है बहुत से चेहरे, दृश्य-चित्र
मेमने के पीछे भागता भेड़िया
भेड़िये के पीछे भागता नरभक्षी
नरभक्षी के पीछे भागता नर
नर के पीछे भागता नर
और अंत में एक अदृश्य तट
जिसपर कुछ निरंतर भ्रम है बना
मानो कहीं भीतर ही भीतर
मिल रही हो चेतावनी
किर्र- किर्र- किर्र -किर्र.......////
चाट रहे है कई दीमक
मेरे स्वप्न-घर के किवाड़
और तुम खड़े हो सामने मेरे
खोखल में पड़े लिजलिजे
दसियों दांतो वाले मासूम कीड़े से
जो निरंतर मद्धम मेहनतकश है
मेरी आँखों की चमक को
धुंधला करने के लिए,
जिससे मेरा लाख का महल
पाये न जलने अपितु
गिर जाये भुरभुराकर और
हज़ारों छिद्रों से घुंस सके
सिहरती सर्द हवाएं
जमा देने के लिए लाल ग्लेशियर
कभी देखा है उसे
जो चीरता रहता है निपट एकांत को भी
इस अंधियारे में
प्रकट होते है बहुत से चेहरे, दृश्य-चित्र
मेमने के पीछे भागता भेड़िया
भेड़िये के पीछे भागता नरभक्षी
नरभक्षी के पीछे भागता नर
नर के पीछे भागता नर
और अंत में एक अदृश्य तट
जिसपर कुछ निरंतर भ्रम है बना
मानो कहीं भीतर ही भीतर
मिल रही हो चेतावनी
किर्र- किर्र- किर्र -किर्र.......////
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