बहुत कुछ है दरम्याँ
उजालों में ख्वाब
अंधेरों में खुली आँखें
और रास्तों पर चलते
बेख्याल कदम ..,
कुछ ऐसी ख़ामोशी
जिन्हें जुबा देना
हो जाता है मुश्किल ...
ख्वाहिशों की न खत्म होने वाली
फेरहिस्त ...
जो रोज़ बढ़ती जाती है
जैसे रौशनी की
बदलती दूरी में
परछाई ..///
उजालों में ख्वाब
अंधेरों में खुली आँखें
और रास्तों पर चलते
बेख्याल कदम ..,
कुछ ऐसी ख़ामोशी
जिन्हें जुबा देना
हो जाता है मुश्किल ...
ख्वाहिशों की न खत्म होने वाली
फेरहिस्त ...
जो रोज़ बढ़ती जाती है
जैसे रौशनी की
बदलती दूरी में
परछाई ..///