रेत को मुट्ठी में पकड़ के देखा
तो भुरभुरा के खिसक जाती है
रह जाते है तो कुछ कण
जो चिपके रहते है अंतस में
शायद बिना कुछ सोचे
जब तक तुम उन्हें झाड़ न दो ,
मिट्टी को हवा में उड़ते देखा
तो रौशनी के साथ ओझल हो जाती है
रह जाती है तो एक परत
जो बैठी रहती है रोशनदान की जालियों पर
शायद बिना कुछ सोचे
जब तक तुम उन्हें झाड़ न दो,
बारिश की बूंदों को गिरते देखा
तो आंगन में फ़ैल जाती हैं
अपनी पूरी निर्मलता की शिद्दत से
शायद बिना कुछ सोचे
जब तक तुम उन्हें झाड़ न दो,
इंसान को जब पनपते देखा
तो फैला देता हैं हर सम्भावित दिशाओं में
सूक्ष्म बुनावट वाला जाल
जिसमे नज़र आती हैं उसकी पहचान
किसी जालीनुमा मछली के गलफड़ों सी
जिससे वो कहला सके खुद को मोती मछली
शायद बिना कुछ सोचे
जब तक तुम उसे झाड़ न दो
और निकाल न लो उसके गलफड़े में फंसा
वो मोती ,
जिससे वो सिद्ध करना चाहता है
कि वो सीपी हैं /
तो भुरभुरा के खिसक जाती है
रह जाते है तो कुछ कण
जो चिपके रहते है अंतस में
शायद बिना कुछ सोचे
जब तक तुम उन्हें झाड़ न दो ,
मिट्टी को हवा में उड़ते देखा
तो रौशनी के साथ ओझल हो जाती है
रह जाती है तो एक परत
जो बैठी रहती है रोशनदान की जालियों पर
शायद बिना कुछ सोचे
जब तक तुम उन्हें झाड़ न दो,
बारिश की बूंदों को गिरते देखा
तो आंगन में फ़ैल जाती हैं
अपनी पूरी निर्मलता की शिद्दत से
शायद बिना कुछ सोचे
जब तक तुम उन्हें झाड़ न दो,
इंसान को जब पनपते देखा
तो फैला देता हैं हर सम्भावित दिशाओं में
सूक्ष्म बुनावट वाला जाल
जिसमे नज़र आती हैं उसकी पहचान
किसी जालीनुमा मछली के गलफड़ों सी
जिससे वो कहला सके खुद को मोती मछली
शायद बिना कुछ सोचे
जब तक तुम उसे झाड़ न दो
और निकाल न लो उसके गलफड़े में फंसा
वो मोती ,
जिससे वो सिद्ध करना चाहता है
कि वो सीपी हैं /